Category: Literature

अथ श्री भारत कथा

भारत कहानी प्रधान देश है,जो भारतीय भाषाओं को निरंतर समृद्ध करतीं हैं। भारत में सर्वाधिक भाषाएँ (भिन्न बोलियों को न जोड़ें तो भी) प्रचलन में हैं, उससे कहीं अधिक विस्तृत भारत का कहानी संग्रह है।गद्य श्रेणी के निबंधो, प्रतिवेदन, भाष्यों, लेखों, व्यंग्यों, अध्ययन लेखों से इतर सही अर्थों में भाषा को समृद्ध कहानी ही करती है। […]

Atal Chirantan Smritika

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नही, जिन्दगी सिलसिला है,आज कल की न्हीI.                                                                                      -श्री अतल बिहारी वाजपेयी   Late Shri Atal Bihari Vajpayee was a human with extra ordinary abilities and candour and an international leader, transcending all limitations to earn reverence, even from his adversaries. His contribution […]

आज की भाषा

ट्रेंड्ज़ के चलते भाषा का स्वरुप तेज़ी से बदलता जा रहा है| अब वह समय गया जब ‘दूरदर्शन’ या ‘आकाशवाणी’ पर बोले जाने वाली भाषा को आम भाषा कहा जाता था ,अब तो उस भाषा को ‘अति –कठिन’ माना जाता है | यूँ तो बहुभाषिक होना एक गुण होता है […]

महाकवि प्रसाद ( 30 जनवरी, 1890- 15 नवंबर,1937)

चंद्रशेखर आजाद : मुझे लगता है कि मैं आपको हर बार मुश्किल में डाल देता हूँ , प्रसाद जी । जयशंकर प्रसाद : भारत को आजाद कराने के लिए पंडित चंद्रशेखर जो लड़ाई लड़ रहा है उसमे जो कुछ भी सहयोग कर सकूँ तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा । […]

सुभद्रा कुमारी चौहान

“सिंहासन  हिल  उठे,  राजविंशों  ने  भृकुटि  तानी  थी, बूढ़े  भारत  में  आयी  फिर  से  नई  जवानी  थी, गुमी  हुई  आज़ादी  की  कीमत  सब  ने  पहचानी  थी, दूर  फिरिंगी  को  करने  की  सब  ने  मन  में  ठानी  थी, चमक  उठी  सन  सत्तावन  की  वह  तलवार  पुरानी  थी, बुिंदेले  हरबोलों  के  मुख  हमने  […]

‘माँ’ की इच्छा के बिना ‘मातृभाषा’ कैसे?

हाय गायज़! (अंग्रेज़ी शब्द हाय व गायज़) आप सोच रहे होंगे कि ये कैसा अभिवादन हुआ। लेकिन ‘नमस्कार’ पढ़ कर आपकी रूचि इस लेख से चली न जाए इसलिए लेखक को ऐसा करना आवश्यक लगा। दरअसल नमस्कार बोलना हमने सीखा ही नही। बचपन में जब माता जी पी.टी.एम. में साथ […]

कबीरदास : जीवन परिचय (1398- 1518 ईसवीं)

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय जो मन खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय मध्यकालीन भारत में सामाजिक चेतना को जगाने वालों में से एक कबीरदास भक्तिकाल के ऐसे कवि रहे हैं जो समाज को एक नई दिशा देने की कोशिश की । कबीर के जन्म को […]

राहुल सांकृत्यायन : महापंडित मुसाफ़िर

9 अप्रैल,1893 को आजमगढ़ के पन्दहा नामक छोटे से गांव में जन्मे राहुल सांस्कृत्यायन को हिंदी यात्रा वृत्तांत के पितामह के रूप में याद किया जाता है | अपने मूल नाम केदारनाथ पांडेय को त्याग कर इन्होने अपनी गोत्र सांस्कृत्य द्वारा पहचाना जाना ज़ादा उचित समझा | 4 भाइयों और […]

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”

हिंदी साहित्य जगत के महान कवि, कथाकार, निबंधकार, संपादक “अज्ञेय” का जन्म 7 मार्च 1911 को कुशीनगर, उत्तर प्रदेश में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही हुई तथा बचपन में उन्होंने संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं को पढ़ा। आगे चल कर उन्होंने बी. एससी की तथा अंग्रेजी विषय में […]