Literature

कुम्भ मेले का धार्मिक आधार एवं मान्यताएं

February 10, 2019

— Written By नटबर राय कुम्भ मेला भारत में आयोजित किया जाने वाला विशाल हिन्दू तीर्थ है जो विश्व का सबसे बड़ा आयोजन है. इस में विदेश से भी पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं. ये ४ स्थानों पर मनाये जाते हैं. प्रयाग – गंगा , यमुना और सरस्वती नदी के संगम तट पर . […]

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पुनःउठता देश राग

January 28, 2019

“तुझपे कोई ग़म की आंच आने नहीं दूँ ,कुर्बान मेरी जान तुझपे शाद रहे तू ….ऐ वतन …मेरे वतन …” आजकल हर किसी जुबान और whatsapp स्टेटस पर यह गाना सुन ने को मिल ही जाता है,देशभक्ति से जुडी फिल्में बनाने का प्रचलन बढ़ने के साथ देशभक्ति के गानों का दौर फिर लौट कर आ […]

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Literature – Life Long learning

January 26, 2019

— Written By Chetna GargStudent of Architecture at  USAP, GGSIPU. It’s always said that “Literature is the best way to express the power of human mind, the Knowledge of human expressions, the deviations of human nature and the epitome of Wit and humor.” Literature is the mirror of life and society it reflects our ideas, our thoughts, […]

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Redeeming the Redemptor; The Ramakrishna-Vivekananda Way

December 25, 2018

The Young disciples of Sri Ramakrishna Paramhamsa ; consecrated souls like a spectra of pearls in a necklace held together by the thread of their master’s teachings, and with the illustrious life of  their leader Narendranath who described them the glories of Monastic life, were all committed to their expedition towards the light. The ground […]

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अथ श्री भारत कथा

November 13, 2018

भारत कहानी प्रधान देश है,जो भारतीय भाषाओं को निरंतर समृद्ध करतीं हैं। भारत में सर्वाधिक भाषाएँ (भिन्न बोलियों को न जोड़ें तो भी) प्रचलन में हैं, उससे कहीं अधिक विस्तृत भारत का कहानी संग्रह है।गद्य श्रेणी के निबंधो, प्रतिवेदन, भाष्यों, लेखों, व्यंग्यों, अध्ययन लेखों से इतर सही अर्थों में भाषा को समृद्ध कहानी ही करती है। निबंध,सम्पादकीय, भाष्य इत्यादि को रोचक बनाने […]

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The One Name That Will Be Taken Whenever a Bhajan Will Be Sung: Vinod Agarwal

November 13, 2018

9 November In my childhood, Krishna was never a master of intellect as he is for me presently but a vague village guy who always played with the village girls. But a Sunday morning I remember, on the Aastha channel a man was singing Krishna bhajans with immense devotion. He started crying while singing and the […]

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Atal Chirantan Smritika

October 28, 2018

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नही, जिन्दगी सिलसिला है,आज कल की न्हीI.                                                                                      -श्री अतल बिहारी वाजपेयी   Late Shri Atal Bihari Vajpayee was a human with extra ordinary abilities and candour and an international leader, transcending all limitations to earn reverence, even from his adversaries. His contribution to nation building is immeasurable. […]

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The Metamorphosis by Franz Kafka

October 27, 2018

Die Verwandlung popularly known as The Metamorphosis is a classic Kafka Originals. Franz Kafka, the German-language novelist, and short story writer is considered as one of the most influential wordsmith of the early twentieth century. The Metamorphosis by this weird literary Genius is an account of the traveling salesman (Gregor Samsa) who wakes up one […]

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आज की भाषा

September 24, 2018

ट्रेंड्ज़ के चलते भाषा का स्वरुप तेज़ी से बदलता जा रहा है| अब वह समय गया जब ‘दूरदर्शन’ या ‘आकाशवाणी’ पर बोले जाने वाली भाषा को आम भाषा कहा जाता था ,अब तो उस भाषा को ‘अति –कठिन’ माना जाता है | यूँ तो बहुभाषिक होना एक गुण होता है परन्तु हर भाषा में अन्य […]

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महाकवि प्रसाद ( 30 जनवरी, 1890- 15 नवंबर,1937)

September 19, 2018

चंद्रशेखर आजाद : मुझे लगता है कि मैं आपको हर बार मुश्किल में डाल देता हूँ , प्रसाद जी । जयशंकर प्रसाद : भारत को आजाद कराने के लिए पंडित चंद्रशेखर जो लड़ाई लड़ रहा है उसमे जो कुछ भी सहयोग कर सकूँ तो इससे बड़ा सौभाग्य क्या होगा । आप संकोच न करे इस […]

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सुभद्रा कुमारी चौहान

September 19, 2018

“सिंहासन  हिल  उठे,  राजविंशों  ने  भृकुटि  तानी  थी, बूढ़े  भारत  में  आयी  फिर  से  नई  जवानी  थी, गुमी  हुई  आज़ादी  की  कीमत  सब  ने  पहचानी  थी, दूर  फिरिंगी  को  करने  की  सब  ने  मन  में  ठानी  थी, चमक  उठी  सन  सत्तावन  की  वह  तलवार  पुरानी  थी, बुिंदेले  हरबोलों  के  मुख  हमने  सुनी  कहानी  थी, खूब  लड़ीमर्दानी  […]

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‘माँ’ की इच्छा के बिना ‘मातृभाषा’ कैसे?

September 15, 2018

हाय गायज़! (अंग्रेज़ी शब्द हाय व गायज़) आप सोच रहे होंगे कि ये कैसा अभिवादन हुआ। लेकिन ‘नमस्कार’ पढ़ कर आपकी रूचि इस लेख से चली न जाए इसलिए लेखक को ऐसा करना आवश्यक लगा। दरअसल नमस्कार बोलना हमने सीखा ही नही। बचपन में जब माता जी पी.टी.एम. में साथ जाया करती थी तो टीचर […]

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